The Pāśupata Aphorisms
Pāśupatasūtra
पाशुपतसूत्रम्
SKअथातः पशुपतेः पाशुपतं योगविधिं व्याख्यास्यामः //
SKअथातः पशुपतेः पाशुपतं योग-विधिं व्याख्यास्यामः //
SKभस्मना त्रिषवणं स्नायीत //
SKभस्मना त्रिषवणं स्नायीत //
SKहसितगीतनृत्तदुंदुंकारनमस्कारजप्योपहारेणोपतिष्ठेत् //
SKहसित-गीत-नृत्त-दुंदुं-कार-नमस्कार-जप्य-उपहारेण उपतिष्ठेत् //
SKमहादेवस्य दक्षिणामूर्तेः //
SKमहा-देवस्य दक्षिणा-मूर्तेः //
SKमूत्रपुरीषं नावेक्षेत् //
SKमूत्र-पुरीषं न अवेक्षेत् //
SKस्त्रीशूद्रं नाभिभाषेत् //
SKस्त्री-शूद्रं न अभिभाषेत् //
SKयद्य् अवेक्षेद् यद्य् अभिभाषेत् //
SKयद्य् अवेक्षेद् यद्य् अभिभाषेत् //
SKप्राणायामं कृत्वा //
SKप्राण-आयामं कृत्वा //
SKरौद्रीं गायत्रीं बहुरूपीं वा जपेत् //
SKरौद्रीं गायत्रीं बहु-रूपीं वा जपेत् //
SKततो ऽस्य योगः प्रवर्तते //
SKततो ऽस्य योगः प्रवर्तते //
SKदूरदर्शनश्रवणमननविज्ञानानि चास्य प्रवर्तन्ते //
SKदूर-दर्शन-श्रवण-मनन-विज्ञानानि च अस्य प्रवर्तन्ते //
SKसर्वे चास्य वश्या भवन्ति //
SKसर्वे च अस्य वश्या भवन्ति //
SKसर्वेषां चावश्यो भवति //
SKसर्वेषां च अवश्यो भवति //
SKसर्वांश् चाविशति //
SKसर्वांश् चा अविशति //
SKसर्वेषां चानावेश्यो भवति //
SKसर्वेषां च अनावेश्यो भवति //
SKसर्वे चास्य वध्या भवन्ति //
SKसर्वे च अस्य वध्या भवन्ति //
SKसर्वेषां चावध्यो भवति //
SKसर्वेषां च अवध्यो भवति //
SKसर्वत्र चाप्रतिहतगतिर् भवति //
SKसर्वत्र च अप्रतिहत-गतिर् भवति //
SKइत्य् एतैर् गुणयुक्तो [गुणैर् युक्तो] भगवतो महादेवस्य महागणपतिर् भवति //
SKइत्य् एतैर् गुण-युक्तो [गुणैर् युक्तो] भगवतो महा-देवस्य महा-गण-पतिर् भवति //
SKअत्रेदं ब्रह्म जपेत् //
SKअत्र इदं ब्रह्म जपेत् //
SKसद्योजातं प्रपद्यामि //
SKसद्यो-जातं प्रपद्यामि //
SKसद्योजाताय वै नमः //
SKसद्यो-जाताय वै नमः //
SKसार्वकामिक इत्य् आचक्षते //
SKसार्व-कामिक इत्य् आचक्षते //
SKअमङ्गलं चात्र मङ्गलं भवति //
SKअमङ्गलं च अत्र मङ्गलं भवति //
SKअपसव्यं च प्रदक्षिणम् //
SKअपसव्यं च प्रदक्षिणम् //
SKतस्माद् उभयथा यष्टव्यः //
SKतस्माद् उभयथा यष्टव्यः //
SKदेववत् पितृवच् च //
SKउभयं तु रुद्रे देवाः पितरश् च //
SKउभयं तु रुद्रे देवाः पितरश् च //
SKचर्यायां चर्यायाम् //
SKचर्यायां चर्यायाम् //
SKमाहात्म्यम् अवाप्नोति //
SKमाहात्म्यम् अवाप्नोति //
SKअतिदत्तम् अतीष्टम् //
SKअतिदत्तम् अतीष्टम् //
SKअतितप्तं तपस् तथा //
SKअतितप्तं तपस् तथा //
SKभूयस् तपश् चरेत् //
SKनान्यभक्तिस् तु शंकरे //
SKन अन्य-भक्तिस् तु शंकरे //
SKअत्रेदं ब्रह्म जपेत् //
SKअत्र इदं ब्रह्म जपेत् //
SKवामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमो रुद्राय नमः //
SKवाम-देवाय नमो ज्येष्ठाय नमो रुद्राय नमः //
SKसर्वभूतदमनाय नमः //
SKसर्व-भूत-दमनाय नमः //
SKपरिभूयमानश् चरेत् //
SKपरिभूयमानश् चरेत् //
SKपापं च तेभ्यो ददाति //
SKपापं च तेभ्यो ददाति //
SKसुकृतं च तेषाम् आदत्ते //
SKसुकृतं च तेषाम् आदत्ते //
SKअपि तत् कुर्यात् //
SKयेन परिभवं गच्छेत् //
SKयेन परिभवं गच्छेत् //
SKपरिभूयमानो हि विद्वान् कृत्स्नतपा भवति //
SKपरिभूयमानो हि विद्वान् कृत्स्न-तपा भवति //
SKअत्रेदं ब्रह्म जपेत् //
SKअत्र इदं ब्रह्म जपेत् //
SKघोरघोरतरेभ्यश् च //
SKघोर-घोरतरेभ्यश् च //
SKनमस् ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः //
SKनमस् ते अस्तु रुद्र-रूपेभ्यः //
SKगूढविद्या तप आनन्त्याय प्रकाशते //
SKगूढ-विद्या तप आनन्त्याय प्रकाशते //
SKसर्वाणि द्वाराणि पिधाय //
SKसर्वाणि द्वाराणि पिधाय //
SKउन्मतवद् एको विचरेत लोके //
SKउन्मतवद् एको विचरेत लोके //
SKकृतान्नम् उत्सृष्टम् उपाददीत //
SKकृत-अन्नम् उत्सृष्टम् उपाददीत //
SKउन्मत्तो मूढ इत्य् एवं मन्यन्ते इतरे जनाः //
SKउन्मत्तो मूढ इत्य् एवं मन्यन्ते इतरे जनाः //
SKअसन्मानो हि यन्त्राणां सर्वेषाम् उत्तमः स्मृतः //
SKअसन्-मानो हि यन्त्राणां सर्वेषाम् उत्तमः स्मृतः //
SKइन्द्रो वा अग्रे असुरेषु पाशुपतम् अचरत् //
SKइन्द्रो वा अग्रे असुरेषु पाशुपतम् अचरत् //
SKस तेषाम् इष्टापूर्तम् आदत्त //
SKस तेषाम् इष्ट-आपूर्तम् आदत्त //
SKमायया सुकृतया समविन्दत //
SKमायया सुकृतया समविन्दत //
SKनिन्दा ह्य् एषानिन्दा तस्मात् //
SKनिन्दा ह्य् एष आनिन्दा तस्मात् //
SKनिन्द्यमानश् चरेत् //
SKनिन्द्यमानश् चरेत् //
SKसर्वविशिष्टो ऽयं पन्थाः //
SKसर्व-विशिष्टो ऽयं पन्थाः //
SKकुपथास् त्व् अन्ये //
SKकुपथास् त्व् अन्ये //
SKअनेन विधिना रुद्रसमीपं गत्वा //
SKअनेन विधिना रुद्र-समीपं गत्वा //
SKन कश्चिद् ब्राह्मणः पुनर् आवर्तते //
SKन कश्चिद् ब्राह्मणः पुनर् आवर्तते //
SKअत्रेदं ब्रह्म जपेत् //
SKअत्र इदं ब्रह्म जपेत् //
SKतत्पुरुषाय विद्महे //
SKतत्-पुरुषाय विद्महे //
SKतन् नो रुद्रः प्रचोदयात् //
SKतन् नो रुद्रः प्रचोदयात् //
SKइन्द्रियाणाम् अभिजयात् //
SKइन्द्रियाणाम् अभिजयात् //
SKरुद्रः प्रोवाच तावत् //
SKरुद्रः प्रोवाच तावत् //
SKशून्यागारगुहावासी //
SKशून्य-आगार-गुहा-वासी //
SKषण्मासान् नित्ययुक्तस्य //
SKषण्-मासान् नित्य-युक्तस्य //
SKभूयिष्ठं संप्रवर्तते //
SKभूयिष्ठं संप्रवर्तते //
SKमांसम् अदुष्यं लवणेन वा //
SKमांसम् अदुष्यं लवणेन वा //
SKआपो वापि यथाकालम् अश्नीयाद् अनुपूर्वशः //
SKआपो व आपि यथा-कालम् अश्नीयाद् अनुपूर्वशः //
SKगोधर्मा मृगधर्मा वा //
SKगो-धर्मा मृग-धर्मा वा //
SKअद्भिर् एव शुचिर् भवेत् //
SKअद्भिर् एव शुचिर् भवेत् //
SKसिद्धयोगी न लिप्यते कर्मणा पातकेन वा //
SKसिद्ध-योगी न लिप्यते कर्मणा पातकेन वा //
SKऋचम् इष्टाम् अधीयीत गायत्रीम् आत्मयन्त्रितः //
SKऋचम् इष्टाम् अधीयीत गायत्रीम् आत्म-यन्त्रितः //
SKरौद्रीं वा बहुरूपीं वा //
SKरौद्रीं वा बहु-रूपीं वा //
SKअतो योग प्रवर्तते //
SKअतो योग प्रवर्तते //
SKॐकारम् अभिध्यायीत //
SKॐ-कारम् अभिध्यायीत //
SKहृदि कुर्वीत धारणाम् //
SKहृदि कुर्वीत धारणाम् //
SKऋषिर् विप्रो महान् एषः //
SKऋषिर् विप्रो महान् एषः //
SKलभते रुद्रसायुज्यम् //
SKलभते रुद्र-सायुज्यम् //
SKसदा रुद्रम् अनुस्मरेत् //
SKसदा रुद्रम् अनुस्मरेत् //
SKछित्त्वा दोषाणां हेतुजालस्य मूलम् //
SKछित्त्वा दोषाणां हेतु-जालस्य मूलम् //
SKस्थापयित्वा च रुद्रे //
SKस्थापयित्वा च रुद्रे //
SKएकः क्षेमी सन् वीतशोकः //
SKएकः क्षेमी सन् वीत-शोकः //
SKअप्रमादी गच्छेद् दुःखानाम् अन्तम् ईशप्रसादात् //
SKअप्रमादी गच्छेद् दुःखानाम् अन्तम् ईश-प्रसादात् //
SKअत्रेदं ब्रह्म जपेत् //
SKअत्र इदं ब्रह्म जपेत् //
SKईशानः सर्वविद्यानाम् //
SKईशानः सर्व-विद्यानाम् //
SKईश्वरः सर्वभूतानाम् //
SKईश्वरः सर्व-भूतानाम् //
SKब्रह्मणो ऽधिपतिर् ब्रह्मा //
SKब्रह्मणो ऽधिपतिर् ब्रह्मा //